भारत में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए इंडिया इनोवेशन चैलेंज डिजाइन कॉन्टेस्ट (आईआईसीडीसी) आयोजित करने के लिए टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया, एआईसीटीई, डीएसटी और आईआईएम-बेंगलुरु ने गठबंधन किया
July 28, 2019 • Sunil Malviya

वर्ष 2018 में, आईआईसीडीसी ने 1760 कॉलेजों के 26 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स तक पहुंच बनाई। वर्ष 2017 में आयोजित प्रतियोगिता में इंजीनियरिंग के छात्रों ने 20 स्टार्टअप लॉन्च किए और 150 से ज्यादा प्रॉडक्ट्स का पेटेंट कराने के लिए आवेदन दाखिल किया। आईआईसीडीसी द्वारा कृषि, अपशिष्‍ट प्रबंधन और नागरिक आधारभूत ढांचे से जुड़े विभिन्न तरह के स्टार्टअप शुरू करने के विचारों को प्रोत्साहन मिला

Picture 1_FirstRunnerUp Award for IICDC 2018_A. P. Shah Institute of Technology, Maharashtra

Picture 2_ChairmanAward_SRMInstitute of Science &Technology_Tamil Nadu

बेंगलुरु, 28 जुलाई, 2019 :  टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया (टीआई इंडिया), वैधानिक निकाय और भारत में टेक्निकल एजुकेशन के लिए राष्ट्रीय-स्तर की परिषद ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बेंगलुरु (आईआईएमबी) ने इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स में इनोवेशन के माहौल को मजबूती देने, छात्रों की क्षमताओं को निखारने और उनमें स्टार्टअप की संस्‍कृति शुरू करने के लिए गठबंधन किया। इसके लिए यह सुनिश्चित किया गया कि देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले इंजीनियरिंग के छात्रों को इंडिया इनोवेशन चैलेंज डिजाइन कॉन्टेस्ट (आईआईसीडीसी) तक पहुंच हासिल हो। आईआईसीडीसी इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए नेशनल डिजाइन कॉन्टेस्ट है।

इसकी घोषणा आईआईसीडीसी 2018 के फाइनल में इस साल की शीर्ष 10 विजेता टीमों की घोषणा के साथ यह की गई थी। फाइनल में पहुंचे 10 छात्रों को स्टार्टअप आइडिया को लैब से मार्केट तक लाने का अवसर मिलेगा। उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से 4.94 करोड़ रुपये के फंड से समर्थन दिया जाएगा। आईआईएम बेंगलुरु में इनोवेशन और एंटरप्रिन्योरशिप हब एनएसआरसीईएल में इनक्यूबेशन सेंटर खोला जाएगा, जो स्टार्टअप को मदद और प्रोत्साहन देगा। इसके साथ टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया (टीआई इंडिया) के इंजीनियरों के तकनीकी संरक्षण के साथ उन्हें टीआई के उपकरण और तकनीक मुहैया कराई जाएगी। अब तक आईआईसीडीसी ने 20 स्टार्टअप को इनक्‍यूबेट किया है।

आईआईसीडीसी 2018 में तमिलनाडु के एसआरएम इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी  को “इंकलेस प्रिंटिंग टेक्‍नोलॉजी' विषय पर तकनीकी नवाचार के लिए  चेयरमैन अवार्ड प्रदान किया गया था। महाराष्‍ट्र के ए.पी. शाह इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी को उनके नवाचार 'सोलर एनर्जी हार्वेस्टिंग फॉर वायरलेस सेंसर नोड' के लिए पहले रनरअप का पुरस्कार दिया गया था।  पुडुचेरी के श्री मनकुला विनयागार इंजीनियरिंग कॉलेज को उनके नवाचार 'मस्‍टर्ड सीड प्रोसेसर मशीन' के लिए दूसरा रनरअप चुना गया था।

टीआई इंडिया यूनिवर्सिटी प्रोग्राम के निदेशक संजय श्रीवास्तव ने आईआईसीडीसी 2018 के विजेताओं को बधाई देते हुए कहा, “आईआईसीडीसी का विजन छात्रों को इनोवेटर्स और उद्यमी बनने का मौका देना है। छात्रों को लीक से हटकर टेक्नोलॉजी प्रॉडक्ट्स की पेशकश और वास्तविक जिंदगी की कठिन चुनौतियों को सुलझाने का अवसर देना भी आईआईसीडीसी का लक्ष्य है। 2018 में आईआईडीसी ने 1760 कॉलेजों के 26 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स तक अपनी पहुंच बनाई थी और हमें 26 हजार आईडियाज प्राप्त हुए थे। अलग-अलग तरह के स्टूडेंट्स से अलग-अलग तरह के आइडियाज आए।  उदाहरण के लिए इसमें से कई छात्रों ने खेती-बाड़ी पर केंद्रित आइडिया सामने रखे। कृषि वह क्षेत्र है, जो नई और आधुनिकतम तकनीक से बड़े पैमाने पर वंचित है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि आईईसीडीसी 2018 में देश के छोटे शहरों के 90 फीसदी से ज्यादा छात्रों ने भागीदारी की। इसी तरह के जमीन से जुड़े आविष्कारों को  हम आईआईसीडीसी के माध्यम से बढ़ावा देना चाहते है।”

आईआईसीडीसी के साथ साझेदारी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे ने कहा, “एआईसीटीई का मिशन मजबूत तकनीकी संस्थान विकसित करना और वैज्ञानिक विचारधारा को बढ़ावा देना है। हमारा लक्ष्य आईआईसीडीसी के भारत में तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देने के विजन से पूरी तरह मेल खाता है। हम इंजीनियरिंग छात्रों को देश में बदलाव लाने वाली ताकत के तौर पर देखते हैं। उन पर देश के हित में आधुनिक तकनीक से जुड़े नवीनतम आविष्कार करने की जिम्मेदारी है। हमारा यह मानना है कि अगला बड़ा आइडिया देश के किसी भी कोने से आ सकता है। छात्र समुदाय को हमारा संदेश बेहद साधारण है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस कॉलेज में रहते हैं और कहां पढ़ते हैं। अगर आपके पास ताकतवर आइडिया है और आपमें अपने आविष्कारों से बदलाव लाने का जज्बा है तो आईआईसीडीसी अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए आपको मौका देगा।”

डीएसटी की एसोसिएट हेड डॉ. अनिता गुप्ता ने बताया, “आईआईसीडीसी के पिछले तीन कॉन्टेस्ट में छात्रों ने 150 से ज्यादा पेटेंट्स के लिए आवेदन दाखिल किया और हर साल यह संख्या बढ़ती जा रही है। हम आईआईसीडीसी से अपना सहयोग जारी रखेंगे क्योंकि यह छात्रों के नेतृत्व में तकनीक पर आधारित आविष्कारों को प्रोत्साहित करता है। डीएसटी का लक्ष्य विज्ञान और तकनीक में आविष्कारों के लिए भारत को ग्लोबल हब में बदलना है। हम उस तरह के आविष्कार को अपना समर्थन देना चाहते है, जो सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर हकीकत में असरदार साबित हो सके। आईआईसीडीसी छात्रों को दुनिया की वास्तविक कठिनाइयों के रचानात्मक समाधान निकालने का मौका देकर इनोवेशन के इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहती है। विजेता टीमों को प्रारंभिक निवेश उपलब्ध कराने का हमारा लक्ष्य छात्रों के सर्वोत्‍तम आइडियाज को जमीन पर साकार रूप में उतारना है।”

आईआईएमबी में एनएसईआरसीईएल के अध्यक्ष प्रोफेसर वेंकटेंश पंचपगेसन ने बताया, “हालांकि आईआईएमबी तकनीकी संस्थान नहीं है, लेकिन हमारा मजबूती से विश्वास है कि बिजनेस को विकसित करने की अपनी क्षमता के माध्यम से हम स्थिर तकनीकी वेंचर्स की स्थापना में मदद कर सकते हैं। आईआईसीडीसी के आयोजन में पिछले चार साल से टीआई-डीएसटी को सहयोग देना इसका सबूत है। एनएसईआरसीईएल में आईआईएमबी के इनोवेशन और एंटरप्रिन्योरल सेंटर से हमने करीब 50 छात्रों के कारोबार सबंधी आइडियाज को  स्टार्टअप में बदलने में मदद की है।“

तकनीकी शिक्षा में प्रभावशाली और दूरगामी असर डालने के लिए कई हितधारकों से साझेदारी कर, व्यवसाय और प्रबंधन ने विशेषज्ञता के साथ आईआईसडीसी का लक्ष्य इंजीनियरिंग के छात्रों में इनोवेशन और उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही आईआईसीडीसी का विजन विश्व को रहने के लिए बेहतर जगह बनाने के स्पष्ट मकसद से सफल कंपनियों को लॉन्च करने करने में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की मदद करना है और उन्हें इस दिशा में प्रोत्साहन देना है।   

आईआईसीडीसी 2019 की आधिकारिक रूप से घोषणा

टीआई इंडिया ने टीआई इंडिया इनोवेशन चैलेंज डिजाइन कॉन्टेस्ट 2019 के आयोजन की आधिकारिक रूप से घोषणा की, जिसके लिए 23 जुलाई 2019 से 30 अगस्त 2019 तक छात्र रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। छात्र इस लिंक के माध्यम से https://innovate.mygov.in/iicdc2019/ अपने नए-नए आइडियाज को रजिस्टर कराकर कॉन्टेस्ट में शामिल हो सकते हैं।

टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के विषय में

टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स ने लगभग हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (टीआई) की ओर से निर्मित (NASDAQ: TXN) प्रॉडक्ट्स को हर प्रणाली के ऑटोमैटिक संचालन में शामिल किया है। इसमें कनेक्टेड कारों और इंटेलिजेंट होम्स से लेकर अपने आप स्वास्थ्य की निगरानी करने वाले हेल्थ डिवाइसेज से लेकर ऑटोमेटेड फैक्ट्रियां तक शामिल है। कंपनी 30 से ज्यादा देशों में कारोबार का संचालन कर रही है। हम एनालॉग और एम्बेडेड सेमी कंडक्टर चिप्स की इंजीनियरिंग, निर्माण, परीक्षण और बिक्री करते हैं। दुनिया भर में फैले हमारी कंपनी के 30 हजार कर्मचारी पूर्ण समर्पण, मेहनत और प्रतिबद्धता के मूल्यों से प्रेरित होकर कार्य करते हैं। वह हर दिन भविष्य की तकनीक को एक निश्चित आकार देने के काम में जुटे हैं। इस संबंध में और अधिक जानकारी के लिए कृपया www.TI.com पर जाएं।

आईआईएमबी और एनएसआरसीईएल के विषय में

बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टिट्टयूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएमबी) अपनी संपूर्ण, परिवर्तनकारी और नवीनतम शिक्षा प्रणाली से बिजनेस मैनेजमेंट के क्षेत्र में नेतृत्व क्षमता को विकसित करता है और छात्रों में सफल कारोबारी बनने के गुर सिखाता है। ईक्यूयूआईएस से मान्यता प्राप्त बिजनेस स्कूल, आईआईएमबी, भारत और विश्व में शैक्षिक गतिविधियों का जाना-माना हब है। आईईएमबी के रिसर्च सेंटर में सेंटर फॉर कैपिटल मार्केट एंड रिस्क मैनेजमेंट (सीसीएमआरएम), सेंटर फॉर कॉरपोरेट गवर्नेंस एंड सिटिजनशिप (सीसीजीसी), सेंटर फॉर मैनेजमेंट कम्युनिकेशन (सीएमसी), सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी (सीपीपी) शामिल हैं। इसके अलावा आईआईएमबी के शोध केंद्रों में सेंटर फॉर सॉफ्टवेयर एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट (सीएसआईटीएम), सेंटर फॉर टीचिंग एंड लर्निंग (सीटीएल), इंडिया- जापान स्टडी सेंटर, इजरायल सेंटर, एनएसआरसीईएल और सप्लाई चेन मैनेजमेंट सेंटर (एससीएमसी) को शामिल किया गया है।

2002 में अपनी स्थापना के बाद से ही एनएसआरईसीएल लाभकारी एवं गैर-लाभकारी उपक्रम चला रहे स्टार्टअप के संस्थापकों पर प्रभाव डालने के लिए उद्यमियों, कारोबारियों, शिक्षाविदों और इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया है। एनएसआरईसीएल को सरकारी एजेंसियों, कॉरपोरेट्स और संस्थागत भागीदारों से भी समर्थन प्राप्त है।

अनुमान लगाया जाता है कि अपनी तेजी से बढ़ती संरक्षण संबंधी पहलों से एनएसआरसीईएल ने अब तक लगभग 50 हजार कारोबारियों, उभरते व्यावसायियों और उनके भागीदारों पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डाला होगा। एनएसआरसीईएल प्रारंभिक स्टेज के स्टार्टअप विकास के लिए विशेष रूप से उपयोगी प्रोग्राम, मेंटरिंग और नेटवर्किंग सेंशन का आयोजन करता है। एनएसआरसीईएल के संबंध में और अधिक जानने के लिए कृपया www.nsrcel.org पर जाएं

डीएसटी के विषय में

भारत सरकार की ओर से 1971 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की स्थापना की गई थी। डीएसटी ने देश में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभाग कई तरह की गतिविधियों को अंजाम देता है, जिसमें नई-नई तकनीक संबंधी शोध और विकास को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे आम आदमी की तकनीक संबंधी जरूरतें पूरी हो सकें। इसके साथ ही दूसरी तरफ उचित क्षमता और तकनीक का निर्माण पर भी विभाग में जोर दिया जाता है। डीएसटी का एक लक्ष्य नेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंटरप्रिन्योरशिप डिवेलपमेंट बोर्ड (https://www.nstedb.com/) के माध्यम से विज्ञान और तकनीक संबंधी उद्यमिता के विकास, टेक्नॉलजी के बिजनेस और स्टार्टअप की मदद की गतिविधियों को बढ़ावा देना है। बोर्ड शैक्षिक और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सक्रिय संस्थानों से जुड़ा है। देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की कई प्रमुख इंडस्ट्रीज और कंपनियों से भी साझेदारी है।

MyGov के विषय में

तकनीक की मदद से भारत की वास्तविक क्षमता को उभारने के लिए MyGov भारत सरकार की एक नवीनतम पहल है। सरकार ने नागरिकों और सरकार के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी विकसित करने के लिए यह प्लेटफॉर्म बनाया है। इस मंच के माध्यम से सरकार सुशासन के संबंध में नागरिकों से नए-नए विचार, सुझाव और नागरिकों की रचनात्मक क्षमता को प्रोत्साहन देती है और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करती है। MyGov का फोकस सरकार के साथ तालमेल से काम करने के लिए नागरिकों को मजबूत बनाना है, जिससे रचनात्मक ढंग से राष्ट्र के निर्माण में सामूहिक शक्ति लगाई जा सके। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक मंत्रालय (एमईआईटीवाई)  के तहत बनाए गए नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर ने MyGov और उसके 20 सब डोमेन को डिजाइन, डिवेलप और होस्ट किया है।

एआईसीटीई के विषय में

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) एक वैधानिक निकाय और तकनीकी शिक्षा की राष्ट्रीय स्तर की परिषद है। इसे पहले एक सलाहकार संस्था के रूप में नवंबर 1945 में मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने विकसित किया था।  इसके बाद 1987 में संसद में बनाए गए कानून से इसे वैधानिक दर्जा दिया गया। एआईसीटीई भारत में शिक्षा प्रणाली के प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा के उचित योजना और समन्वित विकास के लिए जिम्मेदार हैं। एईसीटीई भारतीय संस्थानों में अपने चार्टर के मुताबिक पोस्टग्रेजुएट और ग्रेजुएट प्रोग्राम को मान्यता देता है। इसके साथ ही एआईसीटीई स्टडीज के वैधानिक बोर्ड, अंग्रेजी और टेक्निकल एजुकेशन में अंडरग्रेजुएट स्टडीज, पीजी और रिसर्च, मैनेजमेंट स्टडीज, वोकेशनल एजुकेशन, टेक्निकल जुकेशन, फार्मास्युटिकल एजुकेशन, आर्किटेक्चर, होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को  भी मान्यता देता है। एआईसीटीई ने दिल्ली में अपना नया मुख्‍यालय बनाया है, जो नई दिल्ली के वसंतकुंज में नेल्‍सन मंडेला रोड पर स्थित है।