सुप्रीम कोर्ट में निर्मोही अखाड़ा ने कहा, उनका 100 सालों से विवादित जमीन पर कब्जा 
August 6, 2019 • Abhishek Verma

राम मंदिर को लेकर मंगलवार से सुनवाई शुरु 


नई दिल्ली । राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू। सुनवाई के दौरान सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा के वकील ने पक्ष रख कहा कि उनका 100 सालों से विवादित जमीन पर कब्जा रहा है। बता दें कि अयोध्या मामले में मध्यस्थता असफल होने के बाद शीर्ष अदालत ने मंगलवार से रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया था। बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एसए. बोबडे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए. नजीर भी शामिल हैं।


निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने शीर्ष अदालत के सामने पक्ष रखा। अखाड़ा के वकील ने दलील दी कि उसका इस जमीन पर सैकड़ों सालों से हक था। वकील ने इसके बाद जमीन पर मालिकाना हक का दावा किया। शीर्ष अदालत को वकील ने नक्शा दिखाते हुए कहा कि उनका सूट विवादत परिसर के अंदरूनी हिस्से को लेकर है। उन्होंने दलील दी,इसपर पहले हमारा कब्जा था। इसके बाद में दूसरे ने बलपूर्वक कब्जे में ले लिया। यह जगह राम जन्मस्थान के नाम से जानी जाती है। यह पहले निर्मोही अखाड़े के कब्जे में थी। निर्मोही अखाड़ा के वकील ने कहा, 'मेरी मांग केवल विवादित जमीन के आंतरिक हिस्से को लेकर है, जिसमें मां सीता की रसोई और भंडार गृह भी शामिल है। ये सभी हमारे कब्जे में रहे हैं। वहां पर उन्होंने हिंदुओं को पूजा पाठ की अनुमति दे रखी है। दिसंबर 1992 के बाद उक्त जगह पर उत्पातियों ने निर्मोही अखाड़ा का मंदिर भी तोड़ दिया था। निर्मोही अखाड़ा कोर्ट में कहा कि निर्मोही अखाड़ा 19-3-1949 से रजिस्टर्ड है। झांसी की लड़ाई के बाद 'झांसी की रानी' की रक्षा ग्वालियर में निर्मोही अखाड़ा ने की थी।


इसके पहले मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक के एन गोविंदाचार्य की अयोध्या विवाद मामले की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। गोविंदाचार्य ने अयोध्या केस की आगामी सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग कराने की मांग की थी। लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को सुप्रीम कोर्ट ने बीच में हस्तक्षेप करने पर लगाई फटकार लगाई। बेंच ने कहा कि कोर्ट कि मर्यादा का ख्याल रखे, चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कोर्ट आपका पक्ष भी सुनेगा।


गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश सफल नहीं हुई है। समिति के अंदर और बाहर पक्षकारों के रुख में कोई बदलाव नहीं दिखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में गठित मध्यस्थता कमिटी भंग करते हुए कहा कि 6 अगस्त से अब मामले की रोज सुनवाई होगी। यह सुनवाई हफ्ते में तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को पूर्व जज जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की समिति गठित की थी। कोर्ट का कहना था कि समिति आपसी समझौते से सर्वमान्य हल निकालने की कोशिश करे। इस समिति में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू शामिल थे। समिति ने बंद कमरे में संबंधित पक्षों से बात की लेकिन हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने सुप्रीम कोर्ट के सामने निराशा व्यक्त करते हुए लगातार सुनवाई की गुहार लगाई। 155 दिन के विचार विमर्श के बाद मध्यस्थता समिति ने रिपोर्ट पेश की और कहा कि वह सहमति बनाने में सफल नहीं रही है।बता दें कि 1 अगस्त को मध्यस्थता समिति ने सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में फाइनल रिपोर्ट पेश की थी और फिर सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मध्यस्थता समिति के जरिए मामले का कोई हल नहीं निकाला जा सका है।