ना मैं घर से बाहर निकलूंगा ना अपनों को निकलने दूंगाl
May 6, 2020 • Canon Times Bureau

इस समय भारत कठिन समय से गुजर रहा है. देश में कोरोना वायरस धीरे-धीरे फैलते जा रहा है. कोरोना वायरस से बचे रहने का सबसे बेहतर तरीका है सोशल डिस्टेंसिंग और अपने आप को भीड़ वाले स्थानों से आइसोलेट कर लेना.


"ना मैं घर से बाहर निकलूंगा ना अपनों को निकलने दूंगा... "अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस वाक्य का मतलब क्या है. इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस जैसी महामारी का सामना कर रही है. इस महामारी से सुरक्षित रहने के लिए हमारे देश में भी लॉक डाउन लगाया गया है. प्रधानमंत्री के इसी कदम को सफल बनाने के लिए अतुल मालिकराम ने इस पहल की शुरुआत की हैं.
अतुल मालिकराम ने कहा कि " इस पहल को शुरू करने का एक ही मकसद है, हमारी और हमारे अपनों की सुरक्षा को बनाए रखना. सरकार ने देश में लॉक डाउन लगाया था ,जो ज्यादा दिनों तक
नहीं लगाया जा सकता है. इसलिए अब सरकार ने थोड़ी-थोड़ी रियायत देना शुरू की है. भारत सरकार ने तमाम नियम बनाकर अब हमारे हाथ में छोड़ दिया है कि हमें कैसे अपने आप को इस महामारी से सुरक्षित रखना है. मैं इस पहल "ना मैं घर से बाहर निकलूंगा ना अपनों को निकलने दूंगा " के जरिए सिर्फ ये सन्देश देना चाहता हूँ कि 'बे वजह ना तो मैं अपने घर से निकलूंगा ना ही अपने परिवार के सदस्यों को बेवजह कहीं जाने दूंगा.' क्योंकि अब हमारी सुरक्षा हमारे हाथ में है.  हमें सरकार द्वारा जारी की गई हर गाइड लाइन का पालन करना है, ताकि हम इस महामारी से उभर कर बाहर आ सके.


साथ ही उन्होंने कहा " हमें हमारे भविष्य निर्माण के लिए वर्तमान को सुरक्षित रखना आवश्यक है, और उसके लिए बेहद जरुरी है. हमारा धैर्यवान होना. सरकार ने जो हमें रियायत दी है हमें उसका  दुरूपयोग नहीं करना है, हमें घर के भीतर रहना है और सुरक्षित रहना है."
भारत सरकार ने रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में कुछ रियायतें दी है, और उसी के चलते लोग घरों से बाहर निकल रहे है. हमें इस वक्त यह भी ध्यान रखना है कि हमारी जरा सी लापरवाही हमें और हमारे परिवार को संकट में डाल सकती है.

हमें अपने रेड, ऑरेंज ज़ोन को ग्रीन जोन में तब्दील करने के लिए सिर्फ अपने धैर्य को ही बनाए रखना है. रेड जोन को ऑरेंज, ऑरेंज को ग्रीन जोन में तब्दील करना है. यह सब होगा हमारे संयम से और नियमों का पालन करने से इसलिए हमें सभी नियमों का सख़्ती से पालन करना है.
जिस तरह हर काली रात के बाद एक सुनहरी सुबह होना निश्चित है, उसी तरह हम भी इस महामारी से जल्द उभर कर बाहर आएंगे और एक नए भविष्य का निर्माण करेंगे.